स्वयं मित्र और शत्रु: भगवद्गीता 6.6 का व्याकरण
एक वाक्य में पाँच 'आत्मा' एक द्वैतवादी गलत पठन को व्याकरण द्वारा असंभव बना देते हैं, कृष्णमूर्ति को स्पष्ट करते हैं, और सदियों की गलत साधना को उजागर करते हैं।
8 min • 2026-02-03
GitaConsciousnessPractice
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